सरकार से रियायती दरों पर ज़मीन पाने वाले दिल्ली के प्राइवेट अस्पतालों में गरीब मरीजों को मुफ्त इलाज सुनिश्चित हो सके, इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक्शन प्लान तैयार करने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि उसके 2018 के फैसले को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए एक स्पष्ट SOP जरूरी है। कोर्ट ने अधिकारियों, ज़मीन के मालिकाना हक रखने वाली एजेंसियों जैसे DDA, MCD और प्राइवेट अस्पतालों की एक हाई-लेवल मीटिंग बुलाने का निर्देश दिया है।

क्या था SC का पुराना फैसला

2018 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जिन निजी अस्पतालों को सरकार ने रियायती दर पर जमीन दी है, उन्हें गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर (EWS) मरीजों का मुफ्त इलाज करना होगा। जस्टिस  प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने कहा कि कोर्ट के पिछले आदेशों के बावजूद, कई अस्पताल आदेश का पालन करने का हलफ़नामा दाखिल करने में नाकाम रहे हैं और कमज़ोर वर्ग (EWS) के मरीज़ों को 10% IPD और 25% OPD इलाज मुफ़्त देने के नियम का उल्लंघन करते पाए गए हैं।

सिर्फ 4 अस्पताल दे रहे मुफ्त इलाज

इससे पहले 10 मई को एमिकस क्यूरी की  ओर से दाखिल रिपोर्ट में कहा गया था कि जिन 51 प्राइवेट अस्पतालों को 2018 का आदेश लागू न करने के लिए अदालत की अवमानना का नोटिस दिया गया था, उनमें से केवल 4 अस्पतालों ने गरीब मरीजों को मुफ़्त इलाज देना शुरू किया है।

हाई लेवल मीटिंग का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार के नर्सिंग होम विभाग की अधीक्षक और EWS प्रभारी डॉ। कुसुम अरोड़ा को 23 मई 2026 को दिल्ली सचिवालय में मीटिंग करने का निर्देश दिया है। मीटिंग में कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरीए वरिष्ठ वकील संजय जैन और वकील निनाद लॉड भी शामिल होंगे। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग, केंद्र सरकार, DDA, लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस, नगर निकायों और नोटिस पाने वाले अस्पतालों के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में हिस्सा लेंगे।

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